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The Harrowing Night

‘ Ralive, Tsaliv ya Galive’. (convert to Islam, leave the place or perish)
‘Ralive, Tsalive ya Galive’.
Everywhere, these words are echoing. Every ticking of the biggest wooden wall clock is making him to shiver.
“They are coming. Nobody is going to save us. They are coming to kill us”, a woman is crying.
Everything was drowning inside a pool of blood. People are laughing harrowingly. He feels a steel touch on his back side of neck. It is piercing inside. It is going deep.
‘Stop it. Stop it. Stop it.’
In every middle of the night, he woke up after experiencing this nightmare. He didn’t forget a single thing which was happened since 20 years ago. He was only 5 years old and on that cold night in which he lost his everyone except his grandmother.
The scar on his back side of the neck was still there.
His phone started ringing. This was not a call, this was his alarm which used to remind him to take his medicine.
Vasuki Dar was only 5 years old when his family slaughtered by unknown people without any reasons. He would have died if his neighbours didn’t come out for help. Although, their help didn’t help him much.
He had moved to Daroja from Sopor with his grandmother. He never thought of leaving Kashmir but that night was not freeing him.
He was not meek or coward but he knew one thing, Kashmir was his home ever and forever. His Dadi used to tell him always- People are bad but not Kashmir. You are still alive because Kashmir loves you.
He completed his study in Kashmir and still he wanted to spend his life into Kashmir. He didn’t hate anyone but every night he used to cry.
He was running tuition classes in Daroja’s main market. He spent his time with young children and teenagers. His doctor always told him- If you want to forget things, you have to move to another place. You cannot forget your past, if you encounter them daily.
But how he could leave everything behind? Kashmir is his only family and he didn’t to make distance from that.
He would not go.

माफ़ कीजियेगा

माफ़ कीजियेगा इस पोस्ट के लिए थोड़ी बेहूदा भाषा में लिखी हुई है
लेकिन क्या फ़र्क़ पड़ता है मेरे लिखने से| Character Judgement तो दो मिनट में दे कर निकल लेंगे देश के राष्ट्रवादी गायक “अभिजीत” की तरह| मतलब अखंड बेहूदा इंसान है, इतना बेहूदा इंसान है ये कि इसकी बेहूदगी देख कर लगता है इसके माँ- बाप ने भी दो बार सोचा होगा- किया जाए या न किया जाए?
मतलब जिसने इतने सुरीले गाने गाये हो उसके दिमाग में इतना जहरीला कीड़ा कैसे पनप सकता है लेकिन इसको देख कर लगता है सुरीली आवाज़ उस वक़्त इसीलिए निकल रही थी क्योंकि कीड़ा बहुत छोटा था और अब बड़ा हो कर कहीं से बाहर निकलने की कोशिश में लगा हुआ है|
अब जरा बात करते हैं परेश रावल की| कहते हैं हैं जब अच्छा एक्टर/ कलाकार किसी किरदार में दिलोदिमाग से घुस जाता है वो वैसा ही बन जाता है और परेश रावल को देख कर लगता है इसने रेपिस्ट और भांड का किरदार बहुत दिल से निभाया था तभी आज ऐसे बोल निकल रहे हैं |
इसकी घटिया बात सुन कर लोग कह रहे हैं- गलती अरुंधति रॉय की है| जब वो ऐसा बोल सकती है तो परेश जी भी बोल सकते हैं उन्हें जीप में बांधने को|
तब मुझे लगता है अच्छा गधों के बच्चों, तो हमने परेश रावल को इसीलिए वोट दिया था ताकि वो किसी की भी बात पर उसको जीप से बांधने की वकालत करे| धन्य हो अच्छा है तुम सब गधों के बच्चें हो और हम बंदरों के|
जब गधों की बात की है तो नरेंद्र मोदी जो की सबसे बड़े गधे हैं मतलब हत्यारे गधे हैं उन्हें भूल नहीं सकती|
Manchester में 19 लोगो के मरने पर धड़धड़ कर के ट्विटर पर शोक व्यक्त कर दिया लेकिन खुद के यहाँ रोजाना लोग मर रहे हैं उसपे क्या हाथों में कोढ़ लग जाता हैं| हद घनचक्कर इंसान है अपना प्रधानमंत्री|
“मैंने बहुत बहुत बड़े लोगो से दुश्मनी मोल ली है|’
अरे भाई कौन हैं ये बड़े लोग? खुद तो गधे से प्रेरणा लेते हो और पूरी दुनिया को गधा बनाने में लगे हो| तमिलनाडु के किसानों ने दिल्ली आकर प्रदर्शन किया उस पर बोलने में मुँह में कनपुरिया पान चबा कर बैठे थे जो बोल नहीं सकते थे और वहां श्रीलंका में जाकर बकर बकर कर दिया तमिल किसानों पर| दे दो न तमिल श्रीलंका को जब श्रीलंका में ही जाकर बोलना था थारे को|
दिमाग का दही कर दिया है इस बतख पार्टी ने| शर्म करो बाबा कुछ तो शर्म करो|
मत करना वैसे वो भी जाने क्या बोल कर करोगे|

Three years of liar

Three years of enormous hippopotamus sized Government and here we are trying to exist like a minuscule particle. Three years of blatant lies and here we are trying to filter a minute detail about education certificate. Three years of utter foolishness and here we are trying to save our heads from trolls.

Not a single man has ever given me any answers when I ask-

1. What are the three main significant work has been done by Modi Govt?
Ans- When you start watching with open eyes, you can see numerous of works. Like Jan-Dhan Yojna, World Yoga Programme, Beti bachao, Beti Padhao Yojna, GST (yet to come) and last but not least, Swacch Bharat Yojna. Demonetisation was all time great move by him.

If these are the significant works by Modi, the utter liar and blood wrench murderer then there are thousand of unsung programmes which had been running by congress since 1947.

2. What is going on with Make in India?
Ans- Bahubali 2 is the greatest example. VFX designers are all from India and this is the success of Bollywood industry. By the way, Modi ji has done so many foreign trips and the this is only 3 years. “First he needs to understand the tactics and then he will do all things.”

Bahubali 2 is a Bollywood thing, I never knew. VFX designers are working before Modi’s arrival. and foreign trips don’t give guarantee for foreign investment.

3. What about the corruption?
Ans- Demonetisation has done everything. It was a great deal. Because of that move, every single black marketer became naked in front of Indians.

I never saw anyone naked in front of me.

By the way, except maligning the image of India, except maligning name of Hindu culture, except ruining the great leaders of India, except ruining future of Indians, except infecting the brains of “Bhakts” and except provoking youth to kill and murder, this government has done – NOTHING.

If anyone has some answers except showing me some false news clips of 7% development rates and some photoshopped Gujrat toilet images, please provide me some.

Otherwise- दोस्ती बनी रहे बस|

डेमोक्रेसी क्या होता है भाई

देश बदल रहा है, और बदलने की न्यूनतम स्पीड 70साल/एक सरकार के दर से है| इतने सालों बाद किसी बुद्धिजीवी सरकार और तेज तर्रार नेताओं से हमने लोकसभा और राज्यसभा को संवारा है और लगातार हर राज्य के विधानसभा में भी जगह दिए जा रहे हैं|
डेमोक्रेसी क्या होता है भाई? डेमोक्रेसी का मतलब, अमां यार डेमोक्रेसी का मतलब हम जैसे लोग देश का नेता चुने| नेता चुने और चुनते चुनते ये भूल गए कि हर system को balance रखना जरुरी होता है|
हाँ तो क्या हम क्या बैलेंस के करने के चक्कर में देश का बेड़ागर्क करा ले, पिछले तीस हजार सालों से तो पुरे भारत का बेड़ागर्क करा रहे थे| न तो बाबर को “बर्बर” करार किया कभी और न महाराणा प्रताप को “महा” महाराणा प्रताप घोषित किया| सबने श्राप दे दिया इसीलिए हमारी धरती माता गुस्सा हो गयी जिसके वजह से अब infosys और IT कंपनियां लोगो को निकाल रही हैं|
अब आप कहोगे ये कैसे बात है- इसमें धरती माता और आईटी कंपनी का relation हो गया?
अरे जब देश के जवान सीमा पर कश्मीर कश्मीर के खेल में मर सकते हैं और उसी वक़्त बिरयानी और डिप्लोमेसी का रायता खा कर बिना डकार मारें कड़ी निंदा कह कर देश के जख्मों पर जो मरहम लगता है वो गाँधी भी न लगा सके, जब इस तरह की बातों से देश का नाम ऊँचा होता रहे तो बेकार के लॉजिक में नहीं पड़ते हैं|
तीस हज़ार सालों पहले जब राम थे तभी उड़ने वाले जहाज बन गए और इन मुगलों ने क्या किया- देश की मिट्टी खोद खोद कर किसी ने क़ुतुब मीनार बना दी तो कभी ताज महल बना दिया, बस मिट्टी पलीत किया|
EVM देश का ही नहीं विश्व के सबसे पहला मशीन है जिसे खुद ब्रह्मा ने बनाया और कहा ये ऐसी मशीन है जो कभी tamper नहीं की जा सकेगी| और अब EVM टैंपरिंग के आरोप लगा लगा कर इस देश के प्रतापी हिन्दू धर्म और उनके रचियता ब्रह्मा का नाम खराब किया जा रहा है|
“अरविन्द केजरीवाल ने जब 2015 के चुनाव जीते वो भी 67 सीटों पर तब उन्हें क्यों याद नहीं आया कि EVM टैम्पर हो सकते हैं?”
वाह! वाह! क्या सवाल है! जरूर आपने भी अपने माँ- बाप के पैसों से प्राइवेट मोदी Institute से पढाई करा है|
इसका तो जवाब बड़ा भारी है- वो क्या है न अरविन्द ने चुनाव जीता था तो कोई भी जीता हुआ बंदा शिकायत नहीं करता, शिकायत वो करता है जिसे शक होता है और उस वक़्त शिकायत दूसरों को करनी थी|
कोई बात नहीं, होता है ऐसे |
जिस प्रगाढ़ता से आरएसएस (RSS) गाँधी, नेहरू और कांग्रेस को गालियां देती है उससे तो यही लगता है कि राष्ट्रपिता सावरकर बनते बनते रह गए थे और हेडगेवार ने आज़ादी की लड़ाई में कितने संघर्ष किये थे|
Logic तो है नहीं जी किसी बात में, हमें क्या लेना है logic से| अगर EVM गड़बड़ है तो होने दे न कोण सा अरविन्द ने प्रधान मंत्री बनना है और कोण सा हमने कुछ और करना है|
इंडिया है ये यहाँ तो सब ऐसे ही चलता है जी!

एक बार ये भी सही, यूपी

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक माना जाता रहा है। यूपी वालों की शान ही अलग है, देश के प्रधान मंत्री को बनाने में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना कोई कम बात थोड़े है, है की नहीं?
हर बार यूपी ने अपनी दिशा और दशा, हर चुनाव में बदलती आयी है। कभी दलितों को मुखिया बनाया और कभी यदुवंशियों को भी बनाया, और सवर्णों को भी मौका दिया।
इस बार भी दिशा बदली और योगी आदित्यनाथ उर्फ़ अजित सिंह बिष्ट ने यूपी के उड़ती कमान अपने कमल करों में दबा ली।
लेकिन इतना हो-हल्ला काहे है भाई?

“अरे दंगई को बना दिया मुख्यमंत्री?”
“मुझे तो यकीन नहीं हो रहा भाजपा कैसे इतनी बड़ी गलती कर रहा है?”
“मोदी जी ने दाल मखनी के नाम पर मसूर की दाल थमा दी, अमां यार!”

क्या दंगई दंगई लगा रखा है भाई? जब प्रधानमंत्री के नाम पर एक दंगई चुन सकते हो तो मुख्यमंत्री के नाम पर योगी बाबा आगये तो दर्द क्यों हो रहा है?
वैसे भी जिस तरह से माननीय नरेंद्र मोदी ने गुजरात दंगों में कोई भूमिका नहीं निभाई उसी तरह से योगी जी ने भी कोई दंगा न कराया न करवाया है।
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से मायावती और अखिलेश सिंह ऐसे बिलबिला रहे हैं जैसे सियार के पुंछ पर किसी ने पैर रख दिया हो। जब मायावती बहन जी जब सवर्णों को गाली देकर मुख्यमंत्री बन सकती हैं तो योगी वहीं तुष्टिकरण की राजनीति कर के दंगई कैसे बन सकते हैं?
जब मुख्यमंत्री नहीं बना सकते तो क्या 20 सालों से घर जमाई की तरह सांसद का चुनाव जितवाए जा रहे हो? मतलब सांसद बन सकता हैं वो लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन सकते!
जितनी बार इरोम जैसे लोगों के राजनीति में आने पर सवाल उठाओगे उतनी बार योगी और मोदी जैसे लोग मंत्री बनेंगे और तुम जैसे लोग उतनी बार आहें भरोगे।
मतलब हद ही हो गयी है- कम से कम एक कट्टर हिन्दू को 5 साल देखो वैसे भी इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है- इतनी बार कट्टर दलित को देखा, कट्टर परिवारवाद को देखा अब एक बार ये भी सही हमारी प्यारी यूपी।

(माफ़ कीजियेगा अगर यूपी पुल्लिंग निकला तो)

Beware the leader who bangs the drums of war

Many of the people in this society mock politics and politicians because they are so fucking ignorant with their own so-called busy life. They think politics is uncalled thing for them. But, you don’t know when it engulfs you inside it like a black hole.
“I believe in God.”
Why the hell you believe in things that has no existent at all? But yeah see, I respect your beliefs and culture and I am not gonna shoot you or curse you just because you like it.

I don’t give a cent to any of the gods or any of the religion or any of the goddamn supernatural thing. And, same rule applies with you too.
I am always asked by people if you are so much interested in politics why don’t you join it?
It is like you like a dog so much, why don’t you transform into one? Is this logical?
Entering politics means what? Is that being a Member of Parliament or member of Assembly or having a state department?
What do you mean by entering into politics?
Do you vote? If yes then yeah you are into it too. And if you don’t vote then don’t give me a lecture about politics because you don’t have any right to speak in front of me. Ain’t you a lazy ass?

Quoting Aristotle- “by nature, man is a political animal.”
So, I am a human being by the grace of nature and I am a political too.
But, I don’t want to go and campaigning like a nincompoop because I know what you all are made up of.
Why would someone in their right mind ever want to sacrifice anything for a pack of shit like you?
And, if you think something is happening bad to you because of the system just go and flush your mouth before speaking a word.
Many of you will one day get a work visa from some developed country and you will soon start your packing bags. I know you start your country like many of us, you also love to boast off nation’s good thing but at the same time you also start maneuver your skills to find out a way to fly away.
I don’t believe in you because you are the worst thing ever happened to us. You are not gonna change anything.
Now, some of you also asked me- What things you did for society? Why do you have so much problem? You always criticise things.
Yeah, I criticise because I am in my conscience and I know I am right just like you think you are right.
What I did for society, then I would say I am still saving my hopes and energy to make things better for our next generation.
What I did for this society that I never give up on my dreams to see everything green.
You did what? Supporting false news, having perogative thinking towards some sections of this society, playing propagandas on the name of change, hoping for saffronisation, islamic radicalisation or baptisation of the world. I feel pity for you guys.
Julius Ceaser was the king of whom everyone of us know.
He said- “Beware the leader who bangs the drums of war in order to whip the citizenry into a patriotic fervor, for patriotism is indeed a double-edged sword.”
If you still think Ceaser was wrong, Aristotle was wrong, then you should re-visit a library with a brain.

Guys, sorry for every harsh word, but not everyone has privilege to change because they don’t want to. We cannot help them. But, surely we can help us.
Don’t give up and keep the head high as much as you can. We will win and surely change will come.
Fight till the body stands.