डेमोक्रेसी क्या होता है भाई

देश बदल रहा है, और बदलने की न्यूनतम स्पीड 70साल/एक सरकार के दर से है| इतने सालों बाद किसी बुद्धिजीवी सरकार और तेज तर्रार नेताओं से हमने लोकसभा और राज्यसभा को संवारा है और लगातार हर राज्य के विधानसभा में भी जगह दिए जा रहे हैं|
डेमोक्रेसी क्या होता है भाई? डेमोक्रेसी का मतलब, अमां यार डेमोक्रेसी का मतलब हम जैसे लोग देश का नेता चुने| नेता चुने और चुनते चुनते ये भूल गए कि हर system को balance रखना जरुरी होता है|
हाँ तो क्या हम क्या बैलेंस के करने के चक्कर में देश का बेड़ागर्क करा ले, पिछले तीस हजार सालों से तो पुरे भारत का बेड़ागर्क करा रहे थे| न तो बाबर को “बर्बर” करार किया कभी और न महाराणा प्रताप को “महा” महाराणा प्रताप घोषित किया| सबने श्राप दे दिया इसीलिए हमारी धरती माता गुस्सा हो गयी जिसके वजह से अब infosys और IT कंपनियां लोगो को निकाल रही हैं|
अब आप कहोगे ये कैसे बात है- इसमें धरती माता और आईटी कंपनी का relation हो गया?
अरे जब देश के जवान सीमा पर कश्मीर कश्मीर के खेल में मर सकते हैं और उसी वक़्त बिरयानी और डिप्लोमेसी का रायता खा कर बिना डकार मारें कड़ी निंदा कह कर देश के जख्मों पर जो मरहम लगता है वो गाँधी भी न लगा सके, जब इस तरह की बातों से देश का नाम ऊँचा होता रहे तो बेकार के लॉजिक में नहीं पड़ते हैं|
तीस हज़ार सालों पहले जब राम थे तभी उड़ने वाले जहाज बन गए और इन मुगलों ने क्या किया- देश की मिट्टी खोद खोद कर किसी ने क़ुतुब मीनार बना दी तो कभी ताज महल बना दिया, बस मिट्टी पलीत किया|
EVM देश का ही नहीं विश्व के सबसे पहला मशीन है जिसे खुद ब्रह्मा ने बनाया और कहा ये ऐसी मशीन है जो कभी tamper नहीं की जा सकेगी| और अब EVM टैंपरिंग के आरोप लगा लगा कर इस देश के प्रतापी हिन्दू धर्म और उनके रचियता ब्रह्मा का नाम खराब किया जा रहा है|
“अरविन्द केजरीवाल ने जब 2015 के चुनाव जीते वो भी 67 सीटों पर तब उन्हें क्यों याद नहीं आया कि EVM टैम्पर हो सकते हैं?”
वाह! वाह! क्या सवाल है! जरूर आपने भी अपने माँ- बाप के पैसों से प्राइवेट मोदी Institute से पढाई करा है|
इसका तो जवाब बड़ा भारी है- वो क्या है न अरविन्द ने चुनाव जीता था तो कोई भी जीता हुआ बंदा शिकायत नहीं करता, शिकायत वो करता है जिसे शक होता है और उस वक़्त शिकायत दूसरों को करनी थी|
कोई बात नहीं, होता है ऐसे |
जिस प्रगाढ़ता से आरएसएस (RSS) गाँधी, नेहरू और कांग्रेस को गालियां देती है उससे तो यही लगता है कि राष्ट्रपिता सावरकर बनते बनते रह गए थे और हेडगेवार ने आज़ादी की लड़ाई में कितने संघर्ष किये थे|
Logic तो है नहीं जी किसी बात में, हमें क्या लेना है logic से| अगर EVM गड़बड़ है तो होने दे न कोण सा अरविन्द ने प्रधान मंत्री बनना है और कोण सा हमने कुछ और करना है|
इंडिया है ये यहाँ तो सब ऐसे ही चलता है जी!

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