मेरा बेऔकाती सपना

करना वही चाहिए जो हमेशा आपका मन करें|
लेकिन हमेशा यह सत्य नहीं होता, कभी-कभी कुछ चीजे हमें जबरदस्ती में अच्छा लगने लगता है| सबसे बड़ा उदाहरण था जब मेरा अचानक से Roadies बनने का मन करने लगा और उसके दो साल बाद Neurologist बनने के सपने देखने लगी| अब बेटी जब गीता के पांच अध्याय संस्कृत में याद कर सकती है तो वह तो कुछ भी कर सकती है|
लेकिन गीता और science में जमीन-आसमान से भी ज्यादा का फ़र्क़ था|
उस अजनबी शहर के नामी coaching institute में मैं MBBS की तैयारी करने लगी| एक तो स्कूल में अलग से 11th और 12th की पढाई करो उसपे से एक और tuition पकड़ लो| ज़िंदगी में कुछ बचा ही नहीं था| एक दिहाड़ी मजदूर भी मेरे से कम काम करता होगा, मेरा क्या था सुबह 5 बजे जगो, 2 बजे दोपहर को वापस आओ और फिर चार बजे ट्यूशन जाओ और फिर 9 बजे वापस आओ, उसमे भी चैन नहीं आकर अपने उस बेऔकाती सपने को पूरा करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दो|

सच बता रही हूँ, मैं तब भी नहीं हारी थी| मैं जानती थी इतना आसान नहीं है ये लेकिन ये मेरे लिए भी नहीं है| मैंने रोया, बताया बुला लो वापस मुझसे नहीं होगा लेकिन पापा ने एक ही बात बोली थी- मुझे पता है तुमने गलत चीज़ चुन ली लेकिन अब ये लड़ाई तुम्हारी है, तुम्हे पूरा छूट है गलत होने का, हारने का लेकिन ये लड़ाई से वापस लौटने का कोई सवाल नहीं है|

मैं फिर उस दो तरफ़े लड़ाई में खड़ी हुई| फिर से पन्ने पलटे कुछ समझ नहीं आया और कोशिश की लेकिन कुछ नहीं आया समझ| आखिर Neurologist बनने के लिए क्यों मुझे Physics का Right hand thumb rule समझना जरुरी है ये आज तक समझ नहीं आया|

लेकिन स्कूल और कोचिंग का पहला एग्जाम आया और मुझे मेरे उम्मीदों के नक़्शे पर लाल निशान से जीरो पाया| मैं टूट गयी थी, रातों की नींद ख़राब कर के अंडा देखना मेरे पहले breakup से भी ज्यादा दर्दनाक था|
लेकिन अभी तो और निशान देखने बाकि थी सिर्फ एग्जाम के शीट पर नहीं कहीं मेरी ज़िंदगी और मेरी सोच पर भी|

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